गाँव के बजाय ब्लॉक मुख्यालय पर ही बनाये जाते क्वारंटाइन सेन्टर तो बेहतर होता!

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गाँव के बजाय ब्लॉक मुख्यालय पर ही बनाये जाते क्वारंटाइन सेन्टर तो बेहतर होता!
जागो ब्यूरो रिपोर्ट:

उत्तराखण्ड में बाहर से आ रहे प्रवासी उत्तराखण्ड के लोगों को राज्य में वापस आने पर उनकी ग्राम पंचायतों में बने सरकारी स्कूल या अन्य किसी भवन में चौदह दिन तक क्वारंटाइन किया जा रहा है,जहाँ पर सम्बंधित ग्राम प्रधान,आंगनबाड़ी कार्यकत्री व उस ग्राम के स्कूल के सरकारी शिक्षको की ड्यूटी लगाई गयी है जिसमें शिक्षकों को नोडल ऑफिसर बनाया गया है,उत्तराखण्ड के ज्यादातर गाँवों में प्रवासी लोग बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं,इससे ग्राम प्रधान के साथ-साथ वार्ड में ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों को उन लोगों को उनके ही गांव में चौदह दिन तक क्वारंटाइन रखना टेढ़ी खीर बना हुआ है,क्योंकि अपने गांव में ही क्वारंटाइन होने के कारण लोग वहां नही रुकते,बल्कि इधर उधर घूमते रहते हैं और अपने रिश्ते-नातेदारों से मिलने का प्रयास करते रहते हैं,सीधे अपने गाँव में पहुचने से पर्वतीय जनपदों में कोरोना महामारी के फैलने की आशंका बढ़ गयी हैं तथा ग्राम पंचायत में क्वारंटाइन किये गये लोगों के बाहर घूमने पर रोक टोक करने के कारण गाँव में आपसी मन-मुटाव भी पैदा हो रहा है, ग्राम पंचायतों में क्वारंटाइन किये गये लोगों के बाहर घूमने की घटना प्रति दिन सुनने को मिलती रहती है,इनके बाहर घूमने से गाँवो में भय का माहौल भी बना हुआ है,कई शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्वारंटाइन वार्ड को न बनाकर केवल ब्लॉक मुख्यालय में किसी सरकारी इंटर कॉलेज या अन्य किसी सरकारी भवन में क्वारंटाइन सेन्टर बनाती,तो इससे सभी ग्राम प्रधानों,स्थानीय लोगों और सभी कर्मचारियों को इतनी परेशानी का सामना भी न करना पड़ता और न ही इतनी बड़ी संख्या में क्वारंटाइन वार्ड बनाने पड़ते और पुलिस-राजस्व कर्मियों को इनकी निगरानी करना भी आसान होता तथा मुख्यालय पर होने के कारण इनका मेडिकल चेक करने में भी आसानी होती,इस वैश्विक महामारी कोविड-19के कारण जहां पूरी दुनिया मे हाहाकार मचा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पूरी दुनिया को सामाजिक दूरी बनाये रखने के साथ-साथ घर पर ही रहने की अपील कर रहा है, देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने देश मे लॉक डाउन-4,31 मई तक लागू किया हुआ है,साथ ही सामाजिक दूरी बनाए रखने और घर पर ही रहने की बार बार अपील कर रहे हैं,लेकिन इसके विपरीत शिक्षा विभाग में शिक्षको को अपने मुख्यालय में उपस्थित होने के आदेश दिए जा रहे हैं तथा ग्राम पंचायत स्तर पर बने क्वारंटाइन वार्ड में शिक्षको की ड्यूटी लगाये जाने के आदेश हैं,लॉकडाउन के चलते अधिकाँश शिक्षक अपने अपने गृह जनपदों में अपने घर में रहकर शिक्षा विभाग के आदेशों के अनुसार ऑनलाइन शिक्षण कार्य करा रहे हैं,जिनमें से बहुत सारे शिक्षक ऐसे हैं जो ऑरेंज जोन के जिलों से आते हैं,इस कारण अब शिक्षको के सामने यह समस्या भी आ रही हैं यदि वे अपने ऑरेंज जोन के जिले से अपने मुख्यालय में जाते है तो भारत सरकार की गाइडलाईन के अनुसार उनको खुद ही चौदह दिन तक क्वारंटाइन रहना होगा अब सवाल ये कि ऐसे में वे क्वारंटाइन वार्ड में ड्यूटी कैसे करेंगे?इन सब मुसीबतों से बचने के लिये सरकार और जिला प्रशासन गाँवों में क्वारंटाइन सेंटर बनाने के बजाय ब्लॉक मुख्यालयों में क्वारंटाइन सेन्टर बनाने पर विचार करे!

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