तीर्थ पुरोहित समाज ने किया श्राइन बोर्ड का विरोध: केदारघाटी के गुप्तकाशी में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का फूंका पुतला,पर्यटन मंत्री के खिलाफ लगाए जमकर नारे…

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तीर्थ पुरोहित समाज ने किया श्राइन बोर्ड का विरोध:
केदारघाटी के गुप्तकाशी में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का फूंका पुतला,पर्यटन मंत्री के खिलाफ लगाए जमकर नारे…
मोहन “मोंटी”जागो ब्यूरो रिपोर्ट :

चारधाम श्राइन बोर्ड को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। केदारनाथ तीर्थ पुरोहित समाज और केदारघाटी के स्थानीय व्यापारियों ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है और कहा कि यदि इस श्राइन बोर्ड को केदारनाथ धाम में लागू किया गया तो क्षेत्रीय जनता आंदोलन को मजबूर हो जायेगी, जिसका हर्जाना सरकार को भुगतना पड़ेगा। तीर्थ पुरोहित समाज एवं व्यापारियों ने गुप्तकाशी में आज प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का पुतला दहन किया। साथ ही मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के विरोध में जमकर नारेबाजी भी की।दरअसल, प्रदेश में चार पवित्र धामों बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत अन्य प्रसिद्ध मंदिरों का कायाकल्प, प्रबंधन और यात्रा संचालन वैष्णों देवी माता मंदिर, सांई बाबा, जगन्नाथ और सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर करने की तैयारी चल रही है, जिसको लेकर सरकार ने उत्तराखण्ड चारधाम श्राइन प्रबंधन बोर्ड विधयेक को मंजूरी दी है। श्राइन बोर्ड को मंजूरी दिये जाने से चारधामों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। केदारनाथ तीर्थ पुरोहित समाज ने भी इसका घोर विरोध किया है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमंत तिवाड़ी ने कहा कि श्राइन बोर्ड को मंजूरी देने से सरकार केदारनाथ के हक-हकूकधारियों का हनन करने जा रही है। ऐसे में तीर्थ पुरोहितों में आक्रोश बना हुआ है। सरकार तीर्थ पुरोहितों के हकों को छीनकर अपनी मनमर्जी चलाने का षड़यंत्र रच रही है। ऐसा कदापि नहीं होने दिया जायेगा। कहा कि वर्षो से तीर्थ पुरोहित समाज केदारनाथ यात्रा का बेहतर संचालन करते आ रहे हैं। उनके बुलावे पर ही केदारनाथ में यात्री पहुंचते हैं। छः माह तक केदारपुरी में श्रद्धालुओं की सेवा करने के पश्चात छः माह तक देश-विदेशों में जाकर प्रचार-प्रसार किया जाता है। जिसके बाद ही श्रद्धालु भारी संख्या में केदारनाथ पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि जो हक तीर्थ पुरोहितों का केदारनाथ मंदिर पर है, उसे बरकरार रखा जाय। उनके अधिकारों को छीनने का प्रयास किया गया तो सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने कहा कि उत्तराखण्ड के चारों धामों को श्राइन बोर्ड से जोड़ने की कवायद सरकार की घटिया सोच की मानसिकता को दर्शाता है। इसके साथ ही पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज द्वारा स्थानीय हक हकूक धारियों और तीर्थ पुरोहित समाज को विश्वास में लिए बगैर ही इस प्रकार से कार्य किया जाना, सरकार की हठधर्मिता का सबूत है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य केशव तिवारी ने कहा कि वैष्णो देवी की तर्ज पर श्राइन बोर्ड का गठन स्थानीय व्यवसायियों, तीर्थ पुरोहित समाज एवं घोड़ा, डंडी कंडी चालकों के लिए आफत बनकर आएगा। कहा कि केदारपुरी में तीर्थ पुरोहित समाज द्वारा तीर्थ यात्रियों की सभी सुख सुविधाओं को देखा जाता है। देशभर में भ्रमण कर तीर्थ पुरोहित समाज ही तीर्थ यात्रियों को केदारनाथ धाम आगमन का आमंत्रण देते हैं, लेकिन बिना तीर्थ पुरोहित समाज और स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए ही श्राइन बोर्ड का गठन और बिल पास करना, कहीं ना कहीं सरकार की विकास विरोधी सोच को दर्शा रहा है। वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित लक्ष्मीनारायण जुगरान ने कहा कि वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में कितनी कमियां हैं, यह वहां जाने के बाद ही पता चलता है। हर काम सरकार और प्रशासन संचालित करेगी। कहा कि बद्री केदार मंदिर समिति के नाम में ही असीम आस्था और आध्यात्म छुपा हुआ है, लेकिन श्राइन बोर्ड न केवल सरकार की वामपंथी सोच को दर्शाता है, बल्कि स्थानीय हक हकूक धारियों के विकास में भी बाधा पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि आगामी चार दिसंबर को सैकड़ों की तादाद में स्थानीय हक हकूकदारी देहरादून कूच कर विधानसभा का घेराव करेंगे। साथ ही श्राइन बोर्ड गठन के दूरगामी परिणामों से भी सरकार को अवगत कराया जायेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तीर्थ पुरोहित समाज को आश्वासन दिया था कि बिना उन्हें विश्वास में लिए इस तरह का कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा, मगर विधानसभा सत्र में चारधाम शाइन बोर्ड का बिल पास करके स्थानीय हक हकूकधारी समाज के हक को छीनने का प्रयास किया गया है, जो कदापि सहन नहीं किया जायेगा। वहीं जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमंत तिवाड़ी, जिला पंचायत सदस्य गणेश तिवाड़ी ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि श्राइन बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहित समाज कभी भी प्रदेश सरकार का साथ नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि अपने हक-हकूकों को लेकर चाहे कोई भी कदम क्यूं न उठाना पड़े, तीर्थ पुरोहित समाज पीछे नहीं हटेगा।

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