Great example of reverse migration”Bijni Ecotourism Village”Yamkeshwar Pauri Garhwal….

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यमकेश्वर का बिजनी गाँव “रिवर्स माइग्रेशन ” की पेश कर रहा बेहतरीन मिशाल…

उत्तराखण्ड में मूलभूत आवश्यकताओ की कमी से शिक्षा ,चिकित्सा और रोजगार के लिए पलायन, खाली होते गांव,बंजर होती जमीन जैसी तमाम खबरें हर रोज देखने केा मिलती है, लेकिन आज हम आपका ऐसे ही खाली गांव के बंजर खेतों से जुड़ी सफलता की कहानी दिखाने जा रहे हैं , जी हां एक युवा की स्वारोजगार के लिए ऐसी पहल कि अब बंजर खेत सोना उगल रहे हैं, देखिए जागो उत्तराखण्ड के ये एक्सक्लूसिव रिर्पोट-
ये बंजर खेत पौड़ी जिले के दूरस्थ यमकेश्वर ब्लॉक के बिजनी गांव के हैं ,कभी हरे भरे ये खेत भले आज बंजर हो चुके हैं, लेकिन ये कोई आम बंजर खेत नही है, ये खेत आज बिजनी गांव के कपरवान परिवारों के लिए सोना उगल रहे हैं,ये करिश्मा गांव के 40 वर्षीय हरि प्रसाद कपरवान ने कर के दिखाया है, हरिप्रसाद कुछ साल पहले दिल्ली की एक प्रतिष्ठित साफ्टवेयर डेवलपर कम्पनी मे जनरल मैनेजर की नौकरी करते थे, कम्पनी मे मान-प्रतिष्ठा और एक अच्छी सैलरी थी,लेकिन दिल मे कसक थी तो बचपन में देखे खुशहाल गांव का सुनसान और हरे भरे खेतों का बंजर हो जाना, फिर क्या था साल 2012 मे गांव लौटने का फैसला लिया और ऋषिकेश से 60 किमी गांव दूर यमकेश्वर विधानसभा के अपने बिजनी गांव पहुंचे तो गांव के बंजर खेतों को पर्यटकों के लिए सजाने का बीड़ा उठा लिया,अब इन बंजर खेतों मे कुछ जगह सुन्दर सुन्दर पर्यटक हट्स तो कुछ खेतों मे परम्पारिक खेती से हटकर हर्बल खेती हो रही है, आज बिजनी गांव, दूर दूर से आये पर्यटकों के लिए सुख शान्ति व ईको विलेज का रूप लेकर सैलानियों को न केवल लुभा रहा है वरन गाँव के लोगों की रोजी-रोटी का जरिया भी बन गया है ,वाटिका नाम से शुरू किए इस कैम्प मे हरिप्रसाद ने केवल खुद के लिए स्वरोजगार तैयार नही किया, बल्कि अब उसके 5 भाईयों समेत गांव के 12 युवाओं को रोजगार मिल रहा है,हरिप्रसाद के भाई बताते हैं कि वे कभी नौकरी की तलाश मे दिल्ली व मुम्बई चले गये थे और किसी तरह अपने परिवार को वहीं पाल रहे थे लेकिन जब भाई ने ये काम शुरू किया तो सबको गांव आने की सीख मिली और वे आज बहुत अच्छा पैसा कमा रहे हैं हालांकि शिक्षा की कमी के कारण उनके परिवार आज भी ऋषिकेश रह रहे हैं लेकिन वे रोजगार के लिए गांव मे ही है,बिजनी गांव मे हरिप्रसाद कपरवान की अलग सोच का परिणाम ही है कि आज दूर दूर से आये पर्यटकों को यहां हर्बल फूड्स का स्वाद एक अलग एहसास दिलाता है, दरअसल यहां सिर्फ हर्बल खेती ही नही बल्कि पशुपालन भी हो रहा है जिससे ताजा दूध, दही व अन्य मिल्क प्रोडक्ट भी पर्यटकों को मिलता है,गांव मे खुशनुमा मौसम के एहसास के साथ यहां स्वीमिंग पूल,गेम्स जोन,कैम्प फायर जैसी हर सुविधा भी है, यहां बंजर पड़े खेतों मे आज गांव के बचे खुचे ग्रामीण , बुर्जग भी काम करते हैं,वहीं हरिप्रसाद इस उद्देश्य के साथ काम कर रहे हैं कि वे यहां कम से कम 50 लोगों के लिए रोजगार खड़ा करे,हरिप्रसाद ने साबित कर दिया कि दृढ सोच व कठिन मेहनत इंसान को कामयाबी की हर ऊची मजिंल तर पहुंचा देती है,वहीं उन्होने बिना किसी सरकार मदद के स्वरोजगार के लिए जो पहल की है , वह छोटी छोटी नौकरी की तलाश मे गांव छोड़ रहे युवाओं लिए किसी मिशाल से कम नही है….

 

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