मां कोट भ्रामरी के मेले में पहुंचे सीएम रावत, पूजा-अर्चना की

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पिथोरागढ़। पर्वतीय क्षेत्रों में मंदिरों में आयोजित होने वाले मेले हमेशा से ही हमारी संस्कृति के संवाहक रहे हैं. इन मेलों में पहाड़ की संस्कृति की विरासत की झलक आज भी देखने को मिलती है. कुछ ऐसा ही है मां कोट भ्रामरी का नंदाष्टमी मेला, जहां परंपरागत रीति-रिवाजों के बीच संस्कृति का अनूठा मेल दिखाई देता है.

मां कोट भ्रामरी मंदिर जहां देवी की भ्रमर रूप मे पूजा की जाती है. इस मंदिर मे नंदाष्टमी पर आयोजित होने वाले इस मेले में पूरी रात देवी की आराधना की जाती है. इसमें परंपरागत ढोल और नगाड़ों की थाप और कुछ विशेष कुमाऊंनी गीतों के माध्यम से देवी का आह्वान किया जाता है.

अपनी मनौतियां लेकर पहुंचे भक्त पूरी रात मंदिर परिसर में देवी की इन रीति-रिवाजों के साथ स्तुति करते हैं. इस मेले में पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी मंदिर परिसर मे पारंपरिक वाद्य यंत्र को बजाते हुए प्रवेश किया और इसकी थाप पर देवी का आह्वान करते हुए वो मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पहुंचे.

अपनी संस्कृति के संवर्धन, संरक्षण के लिए सभी लोग आगे आएं, ये संदेश भी सीएम रावत ने लोगों के बीच दिया. ये मेला हमारी सांस्कृतिक विरासत को तो आगे ले ही जा रहे है. साथ ही आज के परिवेश मे हमें अपनी पारंपरिक संस्कृति से भी रूबरू करा रहे हैं. इसी का बेजोड़ उद्हारण है मां कोट भ्रामरी का मेला.

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